कलेक्टर साहिबा-3

< धैर्य और साहस की एक मिसाल >

लेखिका : अंजल राजवीर

My dear beloved readers,

This story is the continued part of our previous story कलेक्टर साहिबा-2. We know you enjoyed our first two stories a lot. We hope you will enjoy the last part of the story as well. Read below to know the last part of story of our courageous and enduring Collector Radha. Thanks

अध्याय 1

राधा मुस्कुराती  है अरे वाह तुम किसी को चाहते भी हो।  कौन है वो खुशकिस्मत लड़की ज़रा मैं भी पढ़ूँ, और वह डायरी खोलने लगती है। तभी मोहन राधा का हाथ पकड़ लेता है। दोनों एक दूसरे को बस महसूस करते हैं। राधा को आज मोहन के छूने से अलग ही एहसास होता है।  वह घबरा जाती है। उसकी धड़कन तेज़ हो जाती है। लेकिन उससे ज्यादा बुरा हाल मोहन का था। उसकी धड़कने तो मानो आज उसका सीना चीर के बहार ही निकल जाये। दोनों को सामने से आ रही हॉर्न से होश आता है और फिर गाड़ी को मोहन आगे बढ़ाता है। रास्ते भर दोनों चुप चुप रहते हैं। अलग एहसाह से दोनों के होठ जैसे सिल से गए थे। राधा का घर आ जाता है, दोनों अंदर जाते हैं। उनके बदले हुए व्यवहार को देखकर राधा की माँ और उसकी सासू माँ, एक दूसरे को इशारे में ही बोलती हैं,” क्या बात है, क्या चल रहा है दोनों के बीच”? दोनों को चाय पीने को कहती हैं। मोहन आज बस बच्चों से मिलकर वापस चला जाता है। रात होती है और राधा मोहन की डायरी को खोल कर पढ़ने लगती है। पढ़ते हुए उस डायरी में एक लाइन लिखी मिलती है जो उसको पूरी तरह सुन्न कर देती है। वो लाइन था ” 5 सालों से जिस लड़की को मैं ढूँढ रहा था वह आज मुझे मिल ही गयी। आज का दिन कितना खूबसूरत है। मुझे मेरी राधा मिल गयी। “

राधा झट से तारीख देखती है की कब मोहन ने ये लिखा था, और तारीख देख कर वो समझ जाती है कि मोहन की राधा कोई और नहीं खुद राधा ही है। उसके मन में हज़ारों बातें गूंजने लगती हैं। हे भगवान् ये क्या हो रहा है, मोहन मेरा इतना अच्छा दोस्त मुझे चाहता है, वो भी कॉलेज के दिनों से।  अब क्या करूँ मैं ? उसे क्या बोलूँ ? मैंने तो कभी ऐसा नहीं सोचा। मुझे अपने बच्चों की फ़िक्र है, नहीं नहीं मैं मोहन से अब नहीं मिलूँगी। क्या सोचेंगे लोग ? मैं एक विधवा, दो दो बच्चों की माँ हूँ। मुझे ये सब शोभा देगा क्या ? राधा महेश के तस्वीर के पास जा कर रोने लगती है।  सुबह राधा को एक बहुत जरुरी काम से एक गाँव जाना था। उस गाँव में किस औरत को मारने की साजिश की बात राधा के कानों तक पहुंची थी। आज की रात राधा के लिए बहुत भारी थी। वह कैसे मोहन जैसे दोस्त को खो देगी यह सोच कर भी बहुत परेशान थी और कल उसे एक बड़े सामजिक कुकृति को ख़त्म करने उस गाँव भी जाना था।

उधर मोहन भी रात भर सो नहीं पाता है। वो रात भर यही सोचता रहता है की कल वो राधा से मिलने जरूर जायेगा और उसे मनाएगा। मोहन की माँ बड़ी ही रूढ़िवादी विचारधारा की थीं, बिलकुल उसके बुआ की तरह। पर मोहन की बहन राधा को अपनी भाभी मान चुकी थी और पूरी तरह से मोहन को सपोर्ट कर रही थी। यह सब बातों से कैसे लड़ेगा वो ? माँ को कैसे मनाएगा ? आखिर में वह सोचता है की पहले राधा मान जाये फिर तो वह पूरी दुनिया को मना लेगा। ये सोचते सोचते उसकी आँख कब लग जाती है उसे पता नहीं चलता।

अध्याय 2

सुबह होते ही मोहन सीधा राधा के दफ्तर पहुंच जाता है। वहां कलेक्टर साहिबा मदद करो के नारे से पूरा माहौल गूंज रहा था। मोहन को पता चलता है की एक गाँव में किसी विधवा ने अपनी मर्जी से शादी कर ली तो उसे लोग मारने को उतारू हैं और उसी गाँव की कुछ औरतें उसे बचाने के लिए कलेक्टर साहिबा के पास नारेबाजी कर रही हैं। राधा अपनी गाड़ी में बैठ कर उस गाँव की ओर निकल पड़ती है। मोहन भी अपनी गाड़ी में राधा के गाड़ी के पीछे जाता है।

गाँव के लोग उस औरत को कोस रहे थे और कुछ लोग उसे पत्थर फेंक कर मार रहे थे। उसका पति जिससे उसने अभी अभी शादी की थी उसे बचाने कि कोशिश कर रहा था। राधा के पहुंचते ही सब लोग रुक जाते हैं। राधा गाड़ी से उतर कर भीड़ के पास जाती है। भीड़ से एक आदमी जोर से चिल्ला कर कहता है की कलेक्टर साहिबा हम इस औरत को जीने नहीं देंगे। ये हमारे समाज को बिगाड़ रही है। राधा उस इंसान को सामने बुला कर पूछती है, इस औरत के शादी करने से समाज का क्या नुकसान हुआ भला, ये बताओ ? ये कैसी सोच है आप लोगों की ? आप लोगों को अपनी ऐसी सोच पे शर्म आनी चाहिए। क्या गलत किये उसने, अगर उसने अपना घर बसा लिया तो ? जब उसके घरवालों और उसके पति को कोई ऐतराज नहीं है तो आप लोगों को क्यूँ है ? कभी आप लोगो ने उसकी मदद की ? नहीं ना ? कभी उसका हालचाल पूछा ? नहीं न ? तो आज कौन होते हैं आप उसे ये करने से रोकने वाले ? उसकी शादी को गलत ठहराने वाले, होते कौन हैं आप ? क़ानूनी रूप से, एक विधवा को दुबारा शादी करने का हक़ है।  इसकी पूरी इजाजत कानून देता है, तो आप कौन होते हैं रोकने वाले ? अगर कोई भी इसके खिलाफ जा कर इसके साथ दुर्व्यवहार करेगा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।  कानून में इसकी बेहद सख्त सजा है और मैं वादा करती हूँ जो कोई भी इसके साथ बुरा बर्ताव करेगा उसे मैं खुद कानून से सख्त से सख्त सजा दिलवाऊंगी। राधा के इस आक्रामक भाषण को सुन कर लोग शांत हो जाते हैं। कुछ लोगो को राधा की बात समझ आ जाती है और उनके चेहरे पे संतोष का भाव दिखता है।  अब वे लोग उस औरत को सहानुभूति की नजर से देखने लगते हैं। लेकिन अभी भी कुछ लोग राधा की बात से असहमत थे। उनके लिए इस बात को स्वीकार करना गवारा नहीं लग रहा था।

राधा का ऐसा रौद्र रूप मोहन उसी भीड़ के बीच में खड़ा हो कर देख रहा था। कैसे आज राधा अकेले समाज के ठेकेदारों का सामना कर रही है और वो भी बिना डरे। राधा ने साहस के साथ अपने दिमाग और अपने आई.ए.एस के पावर का इस्तेमाल करते हुए कैसे उस विधवा औरत को इन्साफ दिलवाया।

भीड़ में से कुछ लोग बड़बड़ाते हुए गुस्से में चले जाते हैं और जो भीड़ वहाँ मौजूद थी वो कलेक्टर साहिबा ज़िंदाबाद के नारे लगाने लगती है।

राधा की नजर मोहन पे भी पड़ती है। पर वो अनजान की तरह उससे मिले बिना चली जाती है। मोहन समझ जाता है की राधा ने उसके मन की बात डायरी में पढ़ ली है। पर राधा के अनजाने व्यवहार से दुखी हो कर लौट जाता है।

अध्याय 3

दिन बीतते जाते हैं, पर राधा मोहन से दूर ही रहती है। भले वो मोहन से बात करना चाहती है पर करती नहीं है।  दूसरी तरफ मोहन राधा के इस व्यवहार से बहुत दुखी रहता है। सारी बातें उसकी माँ को पता चल जाती है। उसकी माँ मोहन के कान भरना शुरू कर देती है। ” तू उस राधा के लिए दुखी है, जिसके आते ही उसके पति को इतनी भयानक बीमारी लग गयी और उसकी जान चली गयी। कुलच्छिनी है वो लड़की, खुद को तो कोई कष्ट नहीं है लेकिन जिसके जीवन से जुड़ जाती है उसका नाश ही करती है। उसपे भी वो दो बच्चों की माँ है। और तू खुद को देख, तुझमे क्या कमी है ? जो तू उससे शादी करना चाहता है। मैं उसे अपनी बहू कभी नहीं मानूंगी। मोहन तू उसको भूल जा। “

मोहन अपनी माँ की बातों का कोई जवाब नहीं देता। उसके लिए राधा का मन जानना ज्यादा जरुरी था। कुछ महीने बाद मोहन की बहन की शादी में मोहन राधा को उसके परिवार सहित बुलाता है। राधा जाने से मना कर देती है। उसके माँ के पूछने पर की वो क्यूँ जाना नहीं चाहती, वह कुछ बता नहीं पाती। उसे मज़बूरी में शादी में जाने के लिए मान जाना पड़ता है।

रात में राधा इस सोच से परेशान रहती है की उसे सुबह मोहन के घर उसके बहन की शादी में जाना है, और वहाँ उसे मोहन का सामना करना पड़ेगा। वो कैसे मोहन का सामना करेगी?

ऐसा नहीं है की वो मोहन से नाराज थी या उससे मिलना नहीं चाहती थी, मोहन के लिए उसके मन में बहुत सम्मान था, पर वह अपने विधवा होने के कारन मोहन से दूर रहना चाहती थी। वह मोहन के माँ के स्वभाव से अच्छी तरह से वाकिफ थी। मोहन की माँ उसे बिलकुल पसंद नहीं करती। ये ही सोचते सोचते राधा की आँख लग जाती है। सुबह राधा का परिवार शादी में जाने के लिए एक दम तैयार हो कर बैठा होता है जब राधा की आँख खुलती है। राधा की माँ ने राधा को बड़े ही मनमोहक ढंग से  तैयार किया। सुनहरी पीली साड़ी लाल गोटे जड़े हुए, राधा की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था।  राधा भी खुद को आईने में देख कर निःशब्द रह जाती है। इतने वर्षों में उसने कभी खुद को इस तरह नहीं सजाया था। वो माँ को मना कर देती है की मैं ऐसे नहीं जाउंगी, मुझे कोई साधारण साड़ी पहना दो, इस तरह देख कर लोग मेरे बारे में तरह तरह के बातें करेंगे। समाज एक विधवा को सजने सँवरने की इजाजत कहाँ देता है। तभी राधा की सासू माँ आती हैं और बोलती हैं कौन होता है तुझे रोकने वाला, बेटा तो मैंने खोया है, उनलोगो का क्या गया है ? अगर मैं तुझे नहीं टोकती बेटी तो समाज कौन होता है तुझे इस सफ़ेद लिबास में लपेटने वाला ? तू हम लोगो के लिए ये साड़ी पहन और साड़ी ही क्यूँ, आज मैं तुझे दुल्हन की तरह सजाऊंगी। राधा रोते हुए बोलती है, माँ जी आप लोगो का साथ और प्यार ही मेरे लिए मेरा श्रृंगार है।  मुझे ऐसे ही रहने दीजिये। पर उसकी सासू माँ और उसकी माँ ने उसकी एक न सुनी, और कहा की आज तू दुल्हन की तरह तैयार हो कर जाएगी राधा और हम देखते हैं कौन तुझे क्या बोलता है। वैसे भी राधा तू एक पढ़ी लिखी लड़की है। तुमने अपने बुद्धि और सहस से कितनो का घर बसाया है। कितने बच्चों और बुजुर्गों का जीवन संवारा है।  तू हमारी कलेक्टर साहिबा है। तू ही तो समाज का सोच बदलेगी। तू मिसाल बनेगी समाज का। उन लोगों के मुँह पर तमाचा मारना है तुझे, जो लोग स्त्री जाती को झूठी बनावटी परम्पराओं में बाँध कर उनका जीवन दूभर कर देते हैं। हिम्मत रख बेटी हम तेरे साथ हैं और तुझे समाज में हर लड़की के लिए एक उदहारण बनाना है। राधा उनकी बातों को मान लेती है और हिम्मत कर के उस सुनहरी लिबास में मोहन की बहन की शादी के लिए निकल पड़ती है।

अध्याय 4

मोहन के घर पे गणेश पूजन की तैयारियां हो चुकी हैं(विवाह जैसे शुभ कार्य में गणेश पूजन का बहुत ही महत्व होता है। हर शुभ कार्य से पहले हिन्दुओं में गणेश पूजन किया जाता है। ) मोहन की नजरें राधा की ही राह देख रही होती हैं। मोहन की माँ को पता नहीं था कि मोहन ने राधा को बुलाया है। तभी मोहन के दरवाजे पे राधा की माँ और उसकी सासू माँ बच्चों के साथ घर के अंदर आती हैं। मोहन उनके स्वागत करने के लिए दरवाजे तक जाता है लेकिन राधा को न देख कर उदास हो जाता है। मोहन की माँ खुश हो जाती हैं कि अच्छा हुआ उस कुलच्छनी को नहीं बुलाया इसने। सब अंदर जाते हैं पर मोहन दरवाजे पर ही खड़ा रहता। उसे ऐसा लग रहा था कि राधा जरूर आएगी। थोड़ी देर में राधा अपने पिता को व्हीलचेयर पे ले के आते हुए दिखाई देती है, मोहन एक दम से खुश हो जाता है। वह तुरंत दौड़ कर राधा के पास जाता है और राधा के पिता को खुद अंदर ले कर आता है।

शादी में आये लोगों ने राधा को उस लिबास में देख कर बातें बनाना शुरू कर दिया। अरे ! देखो एक विधवा आज दुल्हन सी सजी है। मोहन की माँ बोलती हैं, ” हाय राम ! कुलच्छनी यहाँ भी आ गयी।” इस शादी में मोहन की बुआ जी भी आयी हुयी थी, जिनकी बहु की शादी मोहन ने करवाई थी और आज उन्होंने उसका बदला लेने का मन बना लिया। उन सबकी बातों से अनजान मोहन, आज राधा को इस रूप में देख कर मंत्रमुग्ध हो रहा था। राधा इस रूप में किसी देवी जैसे लग रही थी। मोहन की नजरें राधा से हट ही नहीं रही थीं।

राधा गणपति के प्रतिमा को प्रणाम करती है और मोहन की माँ के पैर छूने के लिए झुकती है की उसकी माँ पैर झटकते हुए दूर कर लेती है, और राधा को कहती है, दूर रह तू मुझसे, और वहाँ से चली जाती है। तभी मोहन की बहन राधा को गले लगते हुए मिलती है और बोलती है, आइये न पूजा में बैठिये। मोहन की बुआ को इसी मौके का इंतज़ार था, मौके का फायदा उठाते हुए चिल्ला पड़ती है। अनर्थ हो गया, शुभ कार्य में अशुभ हो रहा है।  एक विधवा, होने वाली सुहागन के साथ बैठेगी ? और लोग उठ खड़े होते हैं। राधा की माँ आगे आती हैं और बोलती हैं, मेरी बेटी विधवा है तो मोहन की माँ भी विधवा है, उन्हें भी अपनी बेटी की शादी में नहीं होना चाहिए। मोहन की बुआ इसका उत्तर देते हुए कहती हैं कि कोई भी माँ अपने बच्चों के लिए अशुभ नहीं होती, वो उसकी माँ है उसके यहां रहने से अशुभ नहीं होता। ये तो इसकी कोई नहीं है फिर भी पूजा में बैठ कर पूजा को अशुद्ध कर रही है। इतने में राधा कि सासू माँ आगे आ कर बोलती हैं, अगर मेरी बहू अशुभ होती, कुलच्छनी होती, तो आज मेरे घर के बच्चों को कभी इतना प्यार दुलार नहीं देती। कुलच्छनी बोलते हो तुमलोग, मैं तो कहती हूँ साक्षात लक्ष्मी है मेरी बहू, इसके आते ही मेरे बच्चों को माँ और बाप दोनों का प्यार मिला।  अगर ये आज न होती तो मेरे बच्चे अनाथ और मैं बेघर हो जाती। मैं भगवान् से दुआ करती हूँ कि राधा को अगले जनम में मेरी बेटी बना कर भेजे, और राधा कि माँ के गले लगते हुए बोलती हैं, आप धन्य हैं बहन जी जो राधा जैसी बेटी को आपने जन्म दिया है। वहाँ खड़ी भीड़ स्तब्ध रह जाती है। लेकिन बिना बदला लिए मोहन की बुआ के कलेजे को ठंडक कैसे मिलती ? वो तपाक से बोलती हैं, क्यूँ रे मोहन, उस दिन तो तू बड़ी बड़ी बातें बना रहा था कि विधवाओं का पुनर विवाह करवाना चाहिए तो अपनी इस दोस्त को क्यूँ नहीं कहता शादी कर ले। इसके तो खुद के बच्चे भी नहीं हैं। मैं तो कहती हूँ, तू ही क्यूँ नहीं इससे शादी कर लेता। या अपनी बारी आई तो सारी नए समाज कि सोच को ताक पर रख दिया तूने। बुआ कि बातों से मोहन झल्ला उठा। मोहन बोलता है, न मैं बदला हूँ और न मेरी सोच, और गौरी माँ के पास रखा उनके सिंदूर को ले कर मोहन राधा की मांग भर देता है। ये देख सब लोगो को सांप सूंघ जाता है, सब  लोग स्तब्ध रह जाते हैं। मोहन की बहन ताली बजाते हुए कहती है, मुबारक हो भईया, अब से राधा आपकी बीवी और मेरी प्यारी भाभी हुयी। राधा की माँ और उसकी सासू माँ की आँखों से ख़ुशी के आंसू बहने लगते हैं। दुल्हन लग रही अपनी माँ को इस खूबसूरत रूप में देख कर बच्चे भी बहुत खुश होते हैं और ताली बजाते हुए बोलते हैं, मम्मा आज आप एक दम गौरी माँ जैसी सुन्दर लग रही हैं। राधा उन्हें सीने से लगाते हुए मोहन को निहारती है। एक पल में मोहन ने उसे नयी जिंदगी दे दी।  लोग मोहन के इस साहस भरे कदम के लिए तालियां बजाने लगते हैं। पूरा मंडप तालियों से गूंज उठता है। मोहन कि बुआ ठगी सी महसूस कर के रह जाती है अपने चेहरे पे एक झूठी मुस्कान ओढ़ लेती है।

इस तरह हमारी कलेक्टर साहिबा के हिम्मत को एक और पंख लग जाते हैं और वो नयी उम्मीदों के साथ नारी जाती के कल्याण करने को राममोहन के साथ नए सफर पे निकल पड़ती है। …

Writer: A. Rajveer

Photo by viresh studio on Pexels.com

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11 Comments »

  1. Amazing… Exactly it’s truth about our society… #If you will try to make some positive changes in society… Many people will be against you #I don’t have the habit of reading story… But this time I completed it at one go…. 👍

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