आजाद भारतवासी

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आजाद तो भारत है, पर भारतवासी आजाद कहाँ?
यहाँ तो सब कैद हैं अपनी गिरी हुई सोच में।।

वक़्त था एक जब बहती थी निर्मल यमुना गंगा।
अब तो बह रही खून की नदियाँ, हर मोड़ पर है दंगा।।

कोई कैद है अपनी मर्दानगी में।
दिखता है जोर उनका उन्ही की दरिंदगी में।।
कैद है कोई अपने जातिवाद की लकीरों में।
क्यूँ देखता है गरीब तू दोस्त इन अमीरों में।।

देश तो आजाद है मेरा, पर गिरफ्त में है हर मोड़।
जाहिलों की नज़रों से हैं सभी डरे सहमें, खौफ की लहरों में।।

साथ देगी क्या ये दुनिया,
यहां तो कैद है बेटी सामजिक जंजीरों में।
देश तो आजाद है, पर आज भी गुलाम है,
कुछ नीच लोगों की करतूतों में।।

रहे नहीं अब वीर वो,
सींचा जिन्होंने चैन अमन को,
अपने खून पसीने से।
कैद हो गया है मुल्क ये मेरा,
फिर से गुलाम सोच की लतीफों में।

आजादी तो मिल गयी, पर नहीं है आजाद यहां गरीब अपनी गरीबी से।
आज भी जान जा रही कई लोगों की फरेबी से।

एक ठेकेदार वो थे, जिन्होनें देश को था दिया भाईचारा,
अब तो पशु भी तरसते मरते बिन चारा।

देश हुआ था आजाद हमारा, हिन्दुस्तानियों की कुर्बानी से।
अब तो बँट रहा है जरा जरा, कुछ ढोंगियों की मनमानी से।।

आजाद तो है भारत मेरा, पर कोई यहां आजाद नहीं।
चले गए वो वीर, अब पहले वाली बात नहीं।।

अभी भी वक़्त है, ऐ मेरे प्यारे भारतवासी,
आजाद कर दो भारत को, मिटा दो हर मोड़ की उदासी।

मान लो तुम आजसे ही, हम सभी हैं भारतवासी।
दो खुशी सभी को, और खुद भी रहो खुशी खुशी।।

लेखिका: अ. राजवीर

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