दोष…!

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अन्नू ज़रा चाय ला कर दो मुझे, अखबार पढ़ते हुए विनय ने कहा। अन्नू जो की विनय की पत्नी है, चाय की कप को पकड़ाते हुए पूछती है, क्या है आज की खबर ? है, रोज की वही खबर, आज भी किसी लड़की के साथ उसके ही मित्र ने उसकी निजी तस्वीर को दिखा कर धमकाते हुए जबरदस्ती किया। हाय राम ! दोस्त भी आज कल ऐसे होते हैं, अन्नू दुःख भरे स्वर में कहती है। तभी विनय बोलता है, ऐसी लड़कियों के साथ यही होता है। यह सुनकर अन्नू पूछती है,कैसी लड़की जी ? मुझे पूरी बात बताइये तो ज़रा। लो खुद ही पढ़ लो। अन्नू अखबार का वह पन्ना ले लेती है ओर पढ़ना शुरू करती है। तो कहानी ये थी की वह मित्र उस लड़की का प्रेमी था जिसने उसे अपने भरोसे में लेकर उसके साथ गलत किया। अन्नू को कुछ समझ नहीं आता की इसमें लड़की का क्या दोष था और बोलती है, लड़की तो अच्छे घर की है। तभी विनय बोलता है, हाँ इसीलिए प्रेमी के साथ ये सब कर रही थी, क्या उसकी गलती नहीं है ? क्यूँ गयी वो उसके साथ अकेले ? ऐसी लड़कियों के साथ और क्या होगा ?
विनय ऑफिस चला जाता है, पर अन्नू का मन उस घटना से बहुत ही आहत हो जाता है। उस पर विनय का उस तरह से सारा दोष लड़की मथ्थे मढ़ देना भी उसे सही नहीं लगा। क्यूंकि आज जो घटना घटी थी वो इसलिए घटी होगी क्यूँकि उस लड़की ने अपने प्रेमी पर विश्वास किया होगा। तो क्या लड़को पर विश्वास करने के कारण हो रहा ये सब ? मतलब यही हुआ की अब कभी किसी पर विश्वास ही मत करो। अन्नू ये इसलिए भी सोच रही थी क्यूँकि बरसों पहले इसी तरह के धोखे की वजह से अन्नू की सहेली ने अपनी जान दे दी थी। पर वह उससे विश्वासघात किसी प्रेमी ने नहीं बल्कि उसके पति ने ही किया था। अन्नू याद करती है की उसकी सहेली रमा कितनी मासूम और भोली भाली हुआ करती थी। पर उस भोली लड़की के भोलेपन ने ही उसकी बलि ले ली। रमा के पति ने उसकी और अपनी निजी तस्वीर निकल कर रमा को धमका कर ये कहा की अगर वो उसके दोस्तों की भोग विलास की वस्तु न बनी तो वह सारी तस्वीर इंटरनेट पर दाल देगा। उसे तो बस अपने बिज़नेस और तरक्की से मतलब है और रही बात रमा की तो वो उसे कभी नहीं छोड़ेगा बस उसकी यही बात मान ले वो। रमा इस सदमें को बर्दास्त नहीं कर सकी और उसने अपनी आबरू बचने के लिए अपनी जान दे दी। लोग आज भी रमा के चरित्र पे ऊँगली उठाते हैं की उसी में दोष होगा। अब ये क्या था ? इस घटना में लड़की यानी रमा की यही गलती थी की उसने अपने पति पे भरोसा किया। इसी तरह समाज में कही बेटी को बाप पैसों के लिए बेच देता है, तो कही उसका पति। तो आखिर लड़की होना पाप ही है न ? या फिर लड़को पे भरोसा ही नहीं करना चाहिए ? आखिर क्या है इसका इलाज ? हर बार सारा दोष सिर्फ लड़की पर ही क्यूँ आ जाता है ? कब बदलेगा ये समाज ? अन्नू मन में बड़बड़ाती है आज के बाद मैं हर लड़की को यही सीख दूंगी की इंसान चाहे कोई भी हो, बाप, पति, दोस्त, प्रेमी, किसी पे विश्वास मत करो। और अगर विश्वास कर ही लिया तुमने तो अंजाम भी भुगत लेना। सारा ठीकरा तो तुम्हारे सर ही फूटना है।

लेखक: टीम आपके किस्से

photo credit: google

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